बदले की कहानी 'रक्तचरित्र-2'

Written by: अंकुर शर्मा

शुक्रवार को रामू के रक्तचरित्र फिल्म का पार्ट2 सिनेमा घरों में पहुंचा है, रक्तचरित्र का पहला भाग जहां बेहद आक्रामक था वहीं इस फिल्म का दूसरा भाग बद ले की कहानी कहता है। जहां पहला पार्ट विवेक ओबरॉय को हीरो बनाता है तो वहीं दूसरे हिस्से के हीरो हैं दक्षिण भारतीय फिल्मों के स्टार सूर्या हैं। सूर्या के प्रेम, क्रोध, प्रतिशोध के प्रबल भावों को सूर्या की आंखों एवं चेहरे पर सहजता से पढ़ा जा सकता है। कहना गलत ना होगा कि सूर्या विवेक पर भारी पड़ गये हैं।

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रामू ने हिंसा का अपना एक स्टाइल विकसित कर लिया है। उनकी एक खासियत है कि वे अपनी फिल्मों में महिलाओं को पृष्ठभूमि में नहीं रखते। उन्हें कमजोर नहीं दिखाते। रक्त चरित्र 2 में भी भवानी अपने पति सूर्या की शक्ति बनती है। वह निडर होकर रवि के खिलाफ चुनाव में खड़ी होती है। भवानी के संवाद एवं दृश्य कम हैं, लेकिन कम दृश्यों में ही प्रियमणि असर छोड़ जाती हैं। रक्त चरित्र 2 अपने पहले पार्ट की अपेक्षा ज्यादा भयानक, कलात्मक और प्रभावशाली है।

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