
कहते हैं दुनिया में मां से बढ़कर कुछ नहीं। मां ही है, जो हमें इस दुनिया में लाती है और जीने के तौर-तरीके सिखाती है। यही कारण है कि मां के दूर होने पर इंसान को सबसे ज्यादा दु:ख होता है। मां से जुड़ी यादें इंसान मरते दम तक नहीं भुला पाता... लखनऊ की सुमन लता सिंह उसी दर्द और यादों को शब्दों में बयां कर रही हैं। सुमन लता इस समय दिल्ली की एक एनजीओ में कार्यरत हैं और सिविल सर्विसेस की तैयारी कर रही हैं।
याद मुझे तू आती है माँ
बारिश की रिमझिम बूंदों में, ख्वाब में और मेरी नींदों में,
हर पल तू मुस्काती है माँ,
याद मुझे तू आती है माँ।
जब-जब धूप का पहरा छाया, तूने अपना आँचल फैलाया,
भीड़ हो या हो तन्हायी, साथ है तेरा एहसास दिलाया।
अपने ममता के आँचल में, हर मुझे सुलाती है माँ,
याद मुझे तू आती है माँ।
मेरे नन्हे कदमों की आहट, तेरे ममतामयी दिल की राहत,
सब दिन बीते कई मौसम आये, कम न हुई कभी तेरी चाहत,
तन्हायी में तेरी ये बातें, आकर मुझे रुलाती है माँ,
याद मुझे तू आती है माँ।
आज भी मेरे खेल खिलौने, माँ तेरी झलक दिखाते हैं,
तेरे साथ में गुजरे पल मेरी माँ, अब भूले नहीं भुलाते हैं,
अपनी बांहों के घेरे में, जैसे मुझे झुलाती है माँ,
याद मुझे तू आती है माँ।
छोङ गई अपने पीछे तू, अपनी अनमिट सी परछाईं,
समझ नहीं पाएगी दुनिया, इस रिष्ते की निष्छल गहराई,
मेरे मन की छोटी सी बगिया, खुशियों से महकाती है माँ,
याद मुझे तू आती है माँ।
आपकी कलम- यदि आप की कलम भी कुछ कहती है, तो लिख भेजिये अपनी कविता या लेख hindi@oneindia.co.in पर।


















